अजनबी ख़ौफ के मंजर का जद है- By:- धीरज कुमार चौहान
Sahitya Aajkal:- हरे कृष्ण प्रकाश (युवा कवि)
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शीर्षक:- अजनबी ख़ौफ वर्क मंजर का जद है
एक वक्त है जो बीत नही रहा,
एक जिंदगी है जो गुजरती जा रही है।।
मौत तो जैसे दहलीज पर खड़ी हो,
और सांस है जो ठहरती जा रही है।।
औरों से दूर और अपनों के करीब किया,
ऐ वक़्त तूने जो भी किया खूब किया।।
अब रोऊँ की लोग मरे जा रहे हैं,
या हंसु की सब अपनों संग जिये जा रहे हैं।।
अजनबी ख़ौफ के मंजर का जद है,
तुम भी हो जद में हम भी हैं जद में।।
मौत के साये भटकते हैं बाहर,
तुम भी हो घर में हम भी हैं घर में।।
कुछ अपने जो सबके परदेश में बसे हैं,
खुदा तू उन्हें कोई तकलीफ ना देना।।
हर दिन कमा कर पेट भरने वालों के,
घर में खुदा तू रोटी दे देना।।
कुछ दिन खुद को बांध लें गर हम,
उड़ेंगे फिर सब खुले आसमां में।।
तूझपे है भरोसा खुदा तू रहम कर,
लौटा दे सुकून तू फिर से इस जहां में।।
✍️ धीरज कुमार चौहान
बीरपुर, सुपौल (बिहार)
इस कविता का वीडियो देखें 👉 https://youtu.be/NMsoIUurCCQ
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हरे कृष्ण प्रकाश
पूर्णियाँ, बिहार
7562026066
नोट:- सभी कविताएँ साहित्य आजकल के youtube पर अपलोड कर दी जाएगी।
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